यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना

यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना की परिकल्पना केवल नई दिल्ली एवं आगरा के मध्य यात्रा समय को कम करने के उद्देश्य से ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के औद्योगिक एवं शहरी विकास को गति प्रदान करने तथा पर्यटन एवं उससे संबंधित अन्य सहायक उद्योगों के समन्वित विकास के लिए आधार तैयार करने के उद्देश्य से भी की गई है।
ग्रेटर नोएडा एवं आगरा के मध्य यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना, जो 6-लेन (भविष्य में 8-लेन तक विस्तारणीय) नियंत्रित प्रवेश (Access Controlled) कंक्रीट पेवमेंट एक्सप्रेसवे है, की परिकल्पना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2001 में की गई थी। इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 20 अप्रैल, 2001 को एक वैधानिक निकाय के रूप में ताज एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (TEA) का गठन किया गया। वर्तमान में ताज एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (TEA) को यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (YEA) के नाम से जाना जाता है।
यमुना एक्सप्रेसवे का विकास निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है
- दिल्ली से आगरा तक यात्रा समय को न्यूनतम करने हेतु तीव्र एवं सुगम परिवहन गलियारा उपलब्ध कराना।
- यमुना नदी के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख नगरों एवं वाणिज्यिक केंद्रों को आपस में जोड़ना।
- क्षेत्र के औद्योगिक एवं शहरी विकास को प्रोत्साहित करना तथा पर्यटन एवं उससे संबंधित अन्य सहायक उद्योगों के समन्वित विकास हेतु आधार उपलब्ध कराना।
- राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) पर यातायात के दबाव एवं भीड़भाड़ को कम करना।
165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership - PPP) मॉडल के अंतर्गत जयप्रकाश समूह (Jaypee Group) द्वारा किया गया है। ताज एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (TEA) एवं रियायतग्राही (Concessionaire) जयप्रकाश इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (JIL) के मध्य रियायत अनुबंध (Concession Agreement) दिनांक 7 फरवरी, 2003 को संपादित किया गया। यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना का औपचारिक उद्घाटन दिनांक 9 अगस्त, 2012 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा किया गया तथा इसे आम जनता के उपयोग हेतु समर्पित किया गया। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹13,000 करोड़ है तथा इसकी रियायत अवधि 36 वर्ष निर्धारित की गई है।
यमुना एक्सप्रेसवे ने नई दिल्ली से आगरा के मध्य यात्रा समय को लगभग आधा कर दिया है। आगरा विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ताजमहल के लिए जाना जाता है, जो भारत के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में से एक है। नई दिल्ली एवं आगरा के मध्य तीव्र एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह एक्सप्रेसवे क्षेत्र के औद्योगिक एवं शहरी विकास को भी गति प्रदान करता है। आगामी वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
परियोजना की पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आगरा के मध्य बेहतर संपर्क स्थापित करने तथा ताजमहल के पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 6-लेन (भविष्य में 8-लेन तक विस्तारणीय) नियंत्रित प्रवेश (Access Controlled) युक्त यमुना एक्सप्रेसवे का विकास कर रही है। ताजमहल विश्व प्रसिद्ध धरोहर है और भारत आने वाले अधिकांश पर्यटक इसके दर्शन अवश्य करते हैं। वर्तमान में आगरा, दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 210 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सामान्यतः एक दिवसीय यात्रा करने वाले पर्यटक दिल्ली से आगरा आने-जाने में लगभग 9 से 10 घंटे व्यतीत कर देते हैं, जिसके कारण उन्हें आगरा स्थित ताजमहल एवं अन्य ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से यमुना एक्सप्रेसवे की परिकल्पना की गई, जिसके अंतर्गत ग्रेटर नोएडा एवं आगरा के मध्य लगभग 160 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे विकसित किया गया, जिससे यात्रा समय घटकर लगभग 100 मिनट रह गया है।
यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना एवं क्षेत्र के समग्र विकास के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या-6, 1976) के अंतर्गत दिनांक 24 अप्रैल, 2001 की अधिसूचना संख्या 697/77-4-2001-3(एन)/2001 द्वारा ताज एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (TEA) का गठन किया। प्राधिकरण के प्रमुख दायित्व निम्नलिखित थे :
- यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना का क्रियान्वयन।
- एक्सप्रेसवे के निर्माण एवं क्षेत्रीय विकास हेतु भूमि का अधिग्रहण।
- एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सुनियोजित विकास हेतु जोनल योजना एवं मास्टर प्लान तैयार करना।
- जल निकासी, फीडर सड़कें, विद्युत आपूर्ति तथा अन्य आधारभूत अवसंरचनात्मक सुविधाओं का विकास।
यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना के प्रमुख उद्देश्य
प्रस्तावित यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं :
- यात्रा समय को न्यूनतम करने हेतु तीव्र एवं सुगम परिवहन गलियारा उपलब्ध कराना।
- यमुना नदी के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख नगरों एवं वाणिज्यिक केंद्रों को आपस में जोड़ना।
- एक्सप्रेसवे से सटे क्षेत्रों के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करना।
- राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) पर यातायात के बढ़ते दबाव को कम करना, जो वर्तमान में फरीदाबाद, बल्लभगढ़ एवं पलवल जैसे शहरों के मध्य से होकर गुजरता है तथा अत्यधिक भीड़भाड़ वाला मार्ग है।
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यमुना एक्सप्रेसवे, वर्तमान राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) एवं राष्ट्रीय राजमार्ग-91 (NH-91) तथा इनके मध्य स्थापित संपर्क मार्गों के साथ मिलकर एक सुदृढ़ सड़क नेटवर्क का निर्माण करेगा, जिससे निम्नलिखित क्षेत्रों के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा :
- नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में विकसित हो रहे विशाल शहरी क्षेत्रों को अलीगढ़, मथुरा एवं आगरा तक सहज एवं त्वरित संपर्क सुविधा प्राप्त होगी।
- सुरक्षित एवं कम समय वाली यात्रा सुविधा तथा बेहतर संपर्क व्यवस्था के माध्यम से यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे वाणिज्यिक, औद्योगिक, संस्थागत, मनोरंजन एवं आवासीय उद्देश्यों के लिए भूमि का सुनियोजित विकास तीव्र गति से संभव होगा।
प्रस्तावित यमुना एक्सप्रेसवे वास्तव में नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक विकसित 6-लेन एक्सप्रेसवे का विस्तार है, जो यमुना नदी के पूर्वी तट पर स्थित विशाल अविकसित क्षेत्र को औद्योगिक एवं शहरी विकास के लिए उपलब्ध कराएगा। साथ ही, यह क्षेत्र में पर्यटन, मनोरंजन, अवकाश तथा ज्ञान-आधारित उद्योगों के समन्वित विकास को भी प्रोत्साहित करेगा।
यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना का क्रियान्वयन परियोजना के रियायतग्राही (Concessionaire) के रूप में जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। जयप्रकाश इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (वर्तमान में जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड, जो रियायत अनुबंध के अनुसार गठित विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) है) तथा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मध्य रियायत अनुबंध (Concession Agreement) दिनांक 07 फरवरी, 2003 को संपादित किया गया।
14वीं बोर्ड बैठक, दिनांक 09-03-2007 में अनुमोदित संरेखण (Alignment) के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 165.537 किलोमीटर निर्धारित की गई है।
रियायत अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, रियायतग्राही को 36 वर्ष की रियायत अवधि तक टोल संग्रह करने का अधिकार प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 2.5 करोड़ वर्गमीटर भूमि के विकास का अधिकार भी प्रदान किया गया है। एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक 100 मीटर चौड़ी भूमि सहित पाँच या अधिक स्थानों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जिनमें से एक स्थान नोएडा/ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में लगभग 50 लाख वर्गमीटर क्षेत्रफल का होगा। यह भूमि वाणिज्यिक, मनोरंजन, औद्योगिक, संस्थागत एवं आवासीय विकास हेतु 90 वर्ष की लीज अवधि के लिए अधिग्रहण लागत पर उपलब्ध कराई जाएगी।
रियायत अनुबंध के अनुसार, एक्सप्रेसवे एवं विकास कार्यों हेतु आवश्यक भूमि रियायतग्राही को अधिग्रहण लागत के साथ-साथ ₹100 प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष की लीज़ दर पर हस्तांतरित की जाएगी। एक्सप्रेसवे के निर्माण की संपूर्ण लागत का वहन रियायतग्राही द्वारा किया जाएगा।